उत्तर प्रदेश ।।जंगल छोड़े खेतों में बनाया आशियाना, आसान शिकार से आलसी हुए गुलदारों का बढ़ रहा वजन और घट रही फुर्ती

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रोशनी या शोर से भी नहीं डरते                           आसान शिकार की तलाश में गांवों की ओर रुख

जिला बिजनौर।।।जंगलों को छोड़कर इंसानी आबादी और खेतों का रुख करने वाले गुलदारों के स्वभाव में चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के हालिया सर्वे और वन विभाग के आंकड़ों ने इस बात की पुष्टि की है कि वनों से निकलकर खेतों में आया गुलदार न रोशनी करने से भागता है न तेज आवाज से। उसका वजन बढ़ रहा है और वह आलसी हो रहा है।

गुलदार की नई पीढ़ी शरीर से और भी भारी और आलसी हो सकती है। 2016 के आसपास अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण गुलदारों ने जंगल छोड़कर बाहर का रुख करना शुरू किया था। अब खेतों में जहां-तहां दिख जाते हैं।

यहां तक कि गुलदार की टेरिटरी रामपुर, मुरादाबाद, संभल और अमरोहा जिले तक पहुंच चुकी है। शुरुआत में गुलदार मनुष्यों को देखकर खेतों में भाग जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। डब्ल्यूआइआइ गुलदारों के स्वभाव पर सर्वे कर रही है। टीम वन विभाग के साथ मिलकर गांवों में जा रही है और गांव वालों से बात कर रही है। गांव वालों ने टीम को बताया कि टार्च की रोशनी करने या गाड़ी की हेडलाइट सामने आने पर भी अब गुलदार नहीं भागता।

गाड़ी के हार्न या शोर मचाने पर भी नहीं भागता है। उल्टे वह रात में बाइक सवारों पर हमला कर रहा है। इंसानों के सामने आकर आराम से बैठ जाना अब आम बात हो गई है। आमतौर पर गुलदार का वजन 60 से 65 किलोग्राम तक माना जाता है लेकिन हाल ही में वन विभाग की ओर से पकड़े गए गुलदारों का वजन 95 से 97 किलोग्राम तक मिला है।

इन गुलदारों के शरीर में लचीलापन या फुर्ती वन के गुलदार की अपेक्षा कम है। डीएफओ जय सिंह कुशवाहा का कहना है कि खेतों व गांवों के पास आसान शिकार मिलने और कोई खतरा न होने के कारण बेपरवाही की जीवनशैली के कारण ऐसा हुआ है। सीसीटीवी कैमरों में कैद गुलदार रात को गांवों में चौकन्ना होने के बजाय आराम से घूमते हुए दिखते हैं।

इन्हीं सब के कारण गांव और शहर के आसपास इन गुलदारों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है और गंभीर बात यह है कि अब यह इंसानों पर भी हमला करने लगे हैं जो कभी इंसानों को देखकर भाग जाया करते थे वर्तमान में कई ऐसी घटनाएं सामने आई है इनके साथ-साथ आबादी वाले इलाकों के आसपास बाघों की संख्या का बढ़ना भी समस्या की गंभीरता को बढ़ाता है इस पर संबंधित विभागों द्वारा गहन मंथन कर योजना बनाकर समाधान खोजना होगा वरना इंसानी जिंदगियां खतरे में पड़ जाएंगी।।।।

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