वृंदावन।।। प्रेमानंद जी के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत क्या केवल आत्महत्या या कुछ और

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वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के 25 साल के शिष्य रसिक दुलारी शरण के चौथी मंजिल से कूदने का CCTV सामने आया है। इसमें दिख रहा कि वह छत की बाउंड्री वॉल पर बैठे। 6 सेकेंड बाद फर्श पर लेट जाते हैं। अचानक उठते हैं और बाउंड्री से छलांग लगा देते हैं।एक नज़र।।।।।।।

 

अब मौत से पहले शरीर के निजी अंग पर गंभीर चोट मिलने और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद मामले की जांच कई सवालों के बीच चल रही है. परिवार ने निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग की है, जबकि संत समाज भी SIT या उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहाहै।

शुक्रवार की सुबह करीब 10:25 बजे रसिक दुलारी शरण अपने कमरे से बाहर निकलते हुए सीसीटीवी में दिखाई दिए. पुलिस के मुताबिक, उनके कपड़ों पर खून लगा हुआ था. इसके बाद वह कुछ देर चलते हुए अपार्टमेंट की चौथी मंजिल की छत पर पहुंचे. जांच के मुताबिक, करीब 10:36 बजे उन्होंने छत से नीचे छलांग लगा दी. गिरने के बाद उन्हें आश्रम से जुड़े लोग गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे।

दीपक को सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद पुलिस को घटना की जानकारी दी गई और जांच शुरू हुई. घटना वृंदावन के वराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट से जुड़ी है. पुलिस अब कमरे से लेकर छत और फिर अस्पताल तक के पूरे घटनाक्रम को सीसीटीवी और दूसरे साक्ष्यों के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है।

इलेक्ट्रिक ग्राइंडर

जांच आगे बढ़ी तो दीपक के कमरे से एक इलेक्ट्रिक टाइल्स ग्राइंडर यानी कटिंग मशीन बरामद होने की बात सामने आई. पुलिस के मुताबिक, उनके निजी अंग पर गंभीर चोट के तथ्य भी जांच में सामने आए. मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि चौथी मंजिल से छलांग लगाने से पहले उन्होंने ग्राइंडर से अपने निजी अंग को नुकसान पहुंचाया था. हालांकि, पुलिस अभी इस पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट 

29 सितंबर को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की मुख्य वजह अत्यधिक खून बहने से लगा शॉक बताई गई. रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट का उल्लेख है, जिस पर 14 टांके लगाए गए थे. निचले होंठ और ठुड्डी पर भी गहरे कट के निशान बताए गए हैं. टखने की हड्डी टूटने और निजी अंग के जड़ वाले हिस्से पर 5 टांके के निशान की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है।

अंदरूनी जांच में खोपड़ी के पीछे हेयरलाइन फ्रैक्चर और खून का थक्का मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, छाती की बाईं तरफ पांचवीं से आठवीं पसलियां टूटी हुई थीं और बायां फेफड़ा भी फटा हुआ पाया गया. रिपोर्ट में शरीर का निजी अंग अलग पाए जाने की बात भी दर्ज है. पुलिस इन चोटों को घटना के पूरे क्रम के साथ जोड़कर देख रही है।

परिवार को ऐसे मिली जानकारी

दीपक के परिवार के मुताबिक, उन्हें फोन के जरिए बताया गया था कि वह गिर गए हैं और उनकी हालत गंभीर है. परिजनों को यह भी बताया गया कि अस्पताल में ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है. इसके बाद मध्य प्रदेश के जबलपुर से परिवार के लोग वृंदावन के लिए रवाना हुए. परिजनों के मुताबिक, वे रात करीब 3 बजे आश्रम पहुंचे।

दीपक के जीजा सोनू पटेल के मुताबिक, परिवार के लोगों ने उनसे संपर्क बनाए रखने की कई कोशिशें की थीं. परिजनों का कहना है कि वे कई बार वृंदावन आए और दीपक से मिलने की कोशिश की, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी. परिवार के मुताबिक, एक समय दीपक परिवार से सामान्य रूप से बातचीत करते थे, लेकिन बाद में संपर्क काफी सीमित हो गया. हालांकि, आश्रम की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक पक्ष नहीं है।

 रसिक दुलारी शरण यानी दीपक लोधी

रसिक दुलारी शरण का वास्तविक नाम दीपक लोधी था. वह मध्य प्रदेश के जबलपुर का रहने वाला था. परिवार के मुताबिक, वह नर्मदा परिक्रमा के बाद वृंदावन पहुंचा और संत जी के आश्रम से जुड़ गया. वर्ष 2024 से वह वृंदावन में रह रहा था. उसे संत प्रेमानंद महाराज का शिष्य बताया गया है।

परिवार के मुताबिक, वृंदावन में रहने के बाद धीरे-धीरे उसका संपर्क परिवार से कम होता गया. एक बार वृंदावन आने के बाद दीपक जबलपुर वापस भी गया था, लेकिन करीब दो साल पहले दोबारा वृंदावन आने के बाद वह घर नहीं लौटा. परिवार का कहना है कि इसके बाद उनसे मिलना भी मुश्किल हो गया था।

संत समाज

दीपक की मौत के बाद वृंदावन के साधु-संतों में भी नाराजगी सामने आई. परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में धर्म रक्षा संघ के बैनर तले साधु-संतों की बैठक हुई. बैठक में मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई. संतों ने सवाल उठाया कि यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और वजह, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

एक नज़र।।।।।।।

फिलहाल दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी अब जिंदा नहीं है मगर आश्रमों में हत्या याद आत्महत्या का यह पहला मामला नहीं इससे पहले भी मानसिक तनाव या आपसी देश में इस तरह की घटनाएं आश्रमों में होती रही है यह वह स्थान है जहां साधारण मनुष्य अपनी श्रद्धा अपना विश्वास लेकर पहुंचता है और समर्पण करके लौटता है लेकिन इस तरह की घटनाएं जब उसकी आस्था पर चोट करती हैं तो उसके दिल से एक ही आवाज निकलती है कि हम फिर ठगे गए। इसलिए आप संत समाज को इस पर बैठकर मंथन करना होगा कि भविष्य में जो भी मनुष्य एक भक्त के रूप में हमारे पास में आता है उसकी आस्था को उसकी श्रद्धा को और उसके समर्पण को ठेस न पहुंचे और दुलारी शरण जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।

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