नैनीताल ।।। सरोवर नगरी में हजारों की संख्या में पहुंचे पर्यटक , कैंची धाम तक जाम ही जाम ,
नैनीताल में गांधी जयंती की छुट्टियों और लंबे वीकेंड के चलते पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. आमतौर पर छुट्टियों में गुलजार रहने वाला नैनीताल इस बार सैलानियों की बड़ी आमद के साथ-साथ भीषण ट्रैफिक जाम का भी गवाह बना. सुबह करीब सात बजे से ही सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ने लगी. कुछ ही देर में हालात ऐसे हो गए कि कई प्रमुख मार्गों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं।
पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही नैनीताल और आसपास के इलाकों में यातायात का दबाव लगातार बढ़ता गया. भवाली से कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई. यही स्थिति गरमपानी और खैरना की ओर जाने वाली सड़कों पर भी देखने को मिली. कारों, बसों और दोपहिया वाहनों की भारी संख्या के कारण सड़क पर आवाजाही बेहद धीमी हो गई. कई स्थानों पर वाहन काफी देर तक एक ही जगह फंसे रहे. कैंची धाम में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और नैनीताल घूमने आए पर्यटकों की भीड़ ने भवाली क्षेत्र में यातायात का दबाव और बढ़ा दिया. भवाली से कैंची धाम के बीच वाहनों की लंबी कतार लगने के बाद जाम का असर आगे के मार्गों तक पहुंच गया. गरमपानी और खैरना की ओर जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जाम में फंसे पर्यटकों के लिए सबसे बड़ी समस्या समय की बर्बादी रही. कई लोग छुट्टियां बिताने के लिए परिवार के साथ नैनीताल पहुंचे थे, लेकिन सफर का बड़ा हिस्सा सड़कों पर ही गुजर गया. हल्द्वानी और काठगोदाम से आगे की यात्रा करने वाले कुछ यात्रियों की ट्रेनें तक छूट गईं. इससे उनकी यात्रा का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ. पहाड़ों में सड़कें पहले से ही सीमित चौड़ाई वाली हैं. ऐसे में एक साथ बड़ी संख्या में निजी वाहनों के पहुंचने से यातायात को सामान्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. नैनीताल के आसपास इस बार भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।

पर्यटकों की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने पहले से ही 2 से 4 अक्टूबर तक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया था. इस व्यवस्था के तहत बाहरी वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर रोकने और वहां से कैंची धाम के लिए शटल सेवा संचालित करने की योजना बनाई गई थी. इसके अलावा भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने की व्यवस्था भी की गई थी. इस ट्रैफिक प्लान का उद्देश्य शहर और आसपास के प्रमुख पर्यटन मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करना था. शुरुआत में निर्धारित पार्किंग और शटल सेवा के जरिए यातायात को नियंत्रित करने की कोशिश की गई, लेकिन जैसे-जैसे पर्यटकों की संख्या बढ़ती गई, व्यवस्थाओं पर दबाव भी बढ़ने लगा. कैंची धाम और भवाली क्षेत्र में पार्किंग की उपलब्ध जगह कम पड़ने लगी. निर्धारित स्थलों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से पार्किंग व्यवस्था प्रभावित हुई और कई पर्यटकों के वाहन मुख्य मार्गों पर हीपहुंचने लगे. इससे पहले से धीमी चल रही यातायात व्यवस्था और ज्यादा प्रभावित हो गई।

विशेष ट्रैफिक प्लान लागू होने के बावजूद लंबी कतारें लगने से व्यवस्थाओं की क्षमता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि जाम के दौरान ट्रैफिक प्लान के किन विशेष प्रावधानों को लागू करने में सबसे ज्यादा दिक्कत सामने आई।
