सुभाष चंद्रा केस।।।।22 हज़ार करोड़ के बदले 6.5 करोड़ पर एनसीएलटी का रुख़ बदला
एनसीएलटी ने अब सुभाष चंद्रा से वसूली योजना पर आम सहमति के लिए पाँच सदस्यों वाली बेंच का गठन किया है.
इस मामले में एनसीएलटी की पाँच जजों की बेंच ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है और निर्देश दिया है कि मामले के निपटारे तक किसी भी संपत्ति पर कोई फ़ैसला न किया जाए.
यह दिवालियापन से जुड़ा केस है, जिसमें 22,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की वसूली का मामला है. एनसीएलटी ने अब कहा है कि दो सदस्यीय बेंच के बहुमत के फ़ैसले पर नहीं पहुँच पाने के बाद यह क़दम उठाया गया है.
इस घटनाक्रम का संबंध सुभाष चंद्रा के उस प्रस्ताव से है, जिसमें 22,006.57 करोड़ रुपये के मंज़ूर दावों के मुक़ाबले 6.25 करोड़ रुपये के भुगतान की पेशकश की गई थी.
एनसीएलटी ने कहा कि चंद्रा की भुगतान योजना को मंज़ूरी देने वाला कोई बहुमत का फ़ैसला नहीं आया था. एनसीएलटी के सदस्य की राय मूल बेंच के दोनों सदस्यों की राय से अलग
स्पष्टीकरण तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा की 25 अगस्त को दी गई 144 पन्नों की राय के बाद आया है. इसे व्यापक रूप से चंद्रा की भुगतान योजना को मंज़ूरी देने वाला माना गया था.
इस विवाद की शुरुआत तीन सितंबर, 2025 को एनसीएलटी के बेंच ऑफ जूडिशल मेंबर अशोर कुमार भारद्वाज और रीना सिन्हा पुरी की ओर से दिए गए अलग-अलग फ़ैसले से हुई थी।
