संघ प्रमुख।।।आरएसएस विविधता का विचार फैलाए’
संघ प्रमुख ने अपने भाषण के दौरान कहा, “एक बार मुस्लिमों ने एक बातचीत के दौरान मुझसे हिंदू राष्ट्र के आरएसएस के विचार के बारे मे पूछा था. उन्होंने कहा था कि क्या इसके मुताबिक़ मुस्लिमों को देश से भगा दिया जाएगा. मैंने कहा कि नहीं, ये हिंदुत्व नहीं है. अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए तो वो फिर हिंदू नहीं रह जाता है.”
उन्होंने कहा, ”जब हम यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका कहते हैं तो एक शब्द की काफ़ी चर्चा की जाती है और वो है बहुलता. और जब हम भारत कहते हैं तो एक और शब्द की चर्चा की जाती है और वो है-यूनिटी इन डायवर्सिटी. ये यूनिटी और डायवर्सिटी दोनों भारत के डीएनए में है.”
उन्होंने कहा, “अगर आप खुद को हिंदू कहलाना चाहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही ईश्वर तक पहुंचते हैं. और हर इंसान का सम्मान और गरिमा है. इंसानों में कोई भेद नहीं है.”
भागवत ने कहा कि हिंदू परंपरा में यह माना जाता है कि सभी धर्म अंततः ईश्वर की खोज की ओर ले जाते हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से उन अलग-अलग धर्मों के लोगों को शरण दी है, जिन्हें कहीं और सुरक्षा नहीं मिली.
हालांकि, उन्होंने कहा कि अतीत की “विरासत” ने समुदायों के बीच तनाव पैदा करने में भूमिका निभाई है.
उन्होंने कहा कि आरएसएस की जिम्मेदारी है कि वह यह विचार समाज तक पहुंचाए कि विविधता के बावजूद सभी के बीच एक मूलभूत एकता है.
उन्होंने कहा, ”जिस तरह मैं अपनी विशिष्ट पहचान की रक्षा करता हूं, उसी तरह मुझे दूसरों की पहचान की भी रक्षा करनी चाहिए. विविधता प्रकृति का नियम है. एकता प्रकृति के पीछे का सत्य है.”

