राजनीतिक झटका ।।।।उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले की याचिका खारिज की
उत्तराखंड हाई कोर्ट में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान के कथित शुद्धिकरण से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को आश्वासन दिया कि पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी और संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखेगी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने एफआईआर दर्ज होने और मामले की जांच जारी रहने के दौरान न्यायिक दखल की जरूरत पर सवाल उठाया। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पुलिस को अपना काम करने देने का आग्रह किया। बेंच ने कहा, ‘एफआईआर दर्ज होने दीजिए, पुलिस को अपना काम करने दीजिए।
राज्य पक्ष की ओर से एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि दोनों पक्षों की ओर से एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है और मामले की जांच पहले से ही चल रही है। राज्य ने जनहित याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। याचिकाकर्ता के वकील ने किसी भी राजनीतिक संबद्धता से इनकार किया और कहा कि जनहित याचिका में केवल घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की
कोर्ट ने एजी की ओर से दिए गए इस आश्वासन को दर्ज किया कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करेगी। न्यायालय ने याचिकाकर्ता से सहमति जताते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज का संरक्षण जांच के लिए प्रासंगिक है और राज्य को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के संरक्षण को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि इस स्तर पर जांच ही उचित प्रक्रिया है। एजी ने यह भी कहा, “पुलिस काम कर रही है, उनको जांच में जो दोषी पाया जाएगा, उसको सजा दी जाएगी। ये तो सामान्य चीज है।
शुद्धिकरण पर ‘राम सेना’ का बयान हम शुद्धि करण के समय तक खड़गे साहब की जाती नहीं जानते थे। उनकी जाति तो हमें कॉंग्रेस के बयानों से पता चली है।।।।
