स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज का जादू सिर्फ हिंदी फिल्मी गानों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने लंबे संगीत सफर में कई भारतीय भाषाओं में गीत गाए। इसी कड़ी में उनका गढ़वाली गीत ‘मन भरमैगे’ उत्तराखंड के संगीत प्रेमियों के लिए खास महत्व रखता है।
‘मन भरमैगे’ गीत को लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज दी थी। इसके बोल देवी प्रसाद सेमवाल ने लिखे और संगीत कुंवर सिंह बबला ने तैयार किया था। वर्ष 2010 में रिलीज हुए इस गीत में पहाड़ की वादियों, बांसुरी की धुन और ग्रामीण लोकजीवन की झलक देखने-सुनने को मिलती है।
इस गीत का भाव बांसुरी की मधुर धुन से मन के मोहित हो जाने से जुड़ा है। गीत में पहाड़ के भंवरे, फूल, पशु-पक्षी और लोकजीवन के माध्यम से संगीत के आकर्षण को खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।
गढ़वाली संगीत प्रेमियों के लिए यह गीत अपनी भाषा और मिट्टी से जुड़ाव की याद दिलाता है। लता मंगेशकर जैसी महान गायिका की आवाज में गढ़वाली गीत सुनना उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए भी एक यादगार बात है। यही वजह है कि यह गीत आज भी श्रोताओं के बीच चर्चा में रहता है।
